Sunday, November 29, 2020
Home diwali, dipawali Kuber dev ki pooja, कुबेर देव की पूजा,

Kuber dev ki pooja, कुबेर देव की पूजा,

Kuber dev ki pooja, कुबेर देव की पूजा,

कुबेर देव kuber dev सुख-समृद्धि और धन प्रदान करने वाले देवता माने गए हैं। धनतेरस के दिन कुबेर देव की पूजा, Kuber dev ki pooja, बहुत फलदाई मानी गयी है ।
जी हाँ धर्म शास्त्रो में जीवन में धन, सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। जिन्हें करने से निश्चित ही हमें अपने कर्मो के श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय कुबेर देव की आराधना कही गयी है, जानिए कुबेर जी की पूजा कैसे करें, Kuber ji ki pooja kaise karen, कुबेर देव को प्रसन्न करने के उपाय, Kuber dev ko prasann karne ke upay, कुबेर देव की कृपा, Kuber dev ki Kripa, कुबेर देव को कैसे करें प्रसन्न, Kuber dev ko kaise karen prasann, kuber dev ka parivar, कुबेर देव का परिवार,

कुबेर देव को प्रसन्न करने के उपाय, Kuber dev ko prasann karne ke upay,

शास्त्रों के अनुसार कुबेर देव Kuber dev को देवताओं का कोषाध्यक्ष माना गया है। अत: धन प्राप्ति के लिए देवी महालक्ष्मी की आराधना करने के साथ साथ धन के देवता कुबेर का भी पूजन अवश्य ही करना चाहिए ।
कुबेर देव की पूजा करने, घर में इनकी मूर्ति या फोटो लगाने से इनकी कृपा से उस घर में धन की कोई भी कमी नहीं रहती है, धन संबंधी सभी कार्यों में समस्त दिशाओं से आसानी से सफलता प्राप्त होती है।
कुबेर देव तृतीया तिथि के स्वामी माने गये है इस दिन कुबेर देव की श्रद्धा से पूजन करने से अतुल धन , ऐश्वर्य एवं समस्त संसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

अगर घर में कुबेर देव की फोटो नहीं है तो उसे शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि या धनतेरस के दिन घर के मंदिर में उत्तर दिशा में स्थापित करें लेकिन इस बात का विशेष ध्यान दें कि वह स्थान बिलकुल साफ सुथरा हो ।

कुबेर देव को शिवजी का परम मित्र माना जाता हैं । इसी लिए कहा जाता है कि जो भगवान भोले नाथ की सच्चे मन से भक्ति करते है कुबेर देव उनपर अपनी विशेष कृपा दृष्टि बनाये रखते है ।
दीपावली के पाँच पर्व में कार्तिक माह की कृष्ण त्रयोदशी को मनाए जाने वाले धनतेरस एवं प्रत्येक माह की तृतीय तिथि को धनाध्यक्ष कुबेर की विशेष पूजा की जाती है।
कहते है यदि इस दिन भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय बेल पत्रों से कुबेर देव की पूजा की जाय तो वह अवश्य ही प्रसन्न होते हैं।

कुबेर जी Kuber ji की पूजा का शिवजी के मंदिर में या बिल्व (बेल) पेड़ के नीचे बैठ कर करने से विशेष फल मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति घोर दरिद्रता व अपयश से पीड़ित है तो धनतेरस से शुरू करके पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से नित्य कुबेर देव की पूजा अर्चना करने से उसके सभी आर्थिक संकट शीघ्र से शीघ्र समाप्त हो जाते है उसके घर में अपार धन-सम्पदा, ऐश्वर्य का वास होता है।

तृतीया तिथि / धनतेरस के दिन कुबेर जी की मूर्ति फोटो के सामने एक पूजा सुपारी को इत्र में डुबो कर लाल कुमकुम से बने स्वस्तिक पर स्थापित करें। फिर इसका धूप, दीप, लाल फल ( लाल सेब, अनार आदि ) , शहद, नैवैद्य इत्यादि से पूजन करें। फिर इसे लाल मिष्ठान से भोग लगा इस पर लाल रंग के कमल या गुलाब के सुगन्धित पुष्प, बेलपत्र अर्पित करें- फिर एक धनदायक कौड़ी सामने रखकर रुद्राक्ष की माला से कुबेर देव का मंत्र

“ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रणवाय धनधान्यादि पतये धनधान्य समृद्घि में देहि देहि दापय दापय स्वाहा।”
मन्त्र की कम से कम माला का जप करें ।

दीपावली Dipavali के दिन भी माता लक्ष्मी की पूजा के बाद कुबेर देव की पूजा, Kuber dev ki pooja, इसी तरह से करें ।

धनतेरस Dhanteras के बाद से इस मंत्र का तीन माह तक लगातार एक माला का जप अवश्य ही करें।
तीन माह के बाद प्रयोग पूरा होने पर इस कौड़ी को अपनी तिजोरी / धन स्थान में लाल कपडे में लपेट कर रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने पर कुबेर देव Kuber dev की कृपा से आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहेगी ।

इसके अतिरिक्त एक और भी अति दुर्लभ और शक्तिशाली कुबेर मंत्र है जिसके नित्य एक माला जपने से धन समृद्धि की प्राप्ति होती है ।
कुबेर देव का मंत्र :

“ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:”।

इस कुबेर मंत्र को रुद्राक्ष की माला से दक्षिण की और मुख करके सिद्ध किया जाता है।

कुबेर जी Kuber ji भगवान शिव के परम मित्र कहे गए है। तृतीया , धनतेरस को कुबेर देव की पूजा, Kuber dev ki pooja, का विशेष महत्व है। मान्यता है कि प्रत्येक तिथी की तृतीया तिथि ,धनतेरस के दिन यदि किसी शिव मंदिर में रात भर के लिए दिया जलाया जाय तो भगवान शिव के साथ साथ कुबेर देव की भी
पूर्ण कृपा मिलती है, उस जातक को जीवन में कभी भी आर्थिक संकट नहीं रहता है उसका घर धन समृद्धि से भरा रहता है। यह धन प्राप्ति का बहुत ही अचूक उपाय है।

Kuber dev ka parivar, कुबेर देव का परिवार,

कुबेर देव Kuber dev धन सम्पदा की दिशा उत्तर के लोकपाल हैं। ये भूगर्भ के भी स्वामी कहे गए हैं।

श्री कुबेर देव Kuber dev मनुष्यों, यक्षों गंधर्वों, राक्षसों और देवों सभी के लिये भी पूजनीय माने है। कुबेर देव के पिता विश्रवा तथा माता का नाम इडविडा हैं। इनकी सौतेली माता का नाम कैकसी था। पिता विश्रवा तथा माता इडविडा के पुत्रों में कुबेर सबसे बड़े थे। शेष रावण, कुंभकर्ण और विभीषण सौतेले भाई थे।

सर्वप्रथम इनका मूल निवास त्रिकूट पर्वत स्थित विश्वकर्मा द्वारा निर्मित स्वर्ण नगरी लंका थी परन्तु बाद में इन्होने कैलाश पर्वत पर स्थित अलकापुरी को अपनी राजधानी बनाया है। कुबेर देव की पत्नी का नाम देवी श्रद्धा तथा दोनों पुत्रों के नाम ‘नल कुबेर’ व ‘नील ग्रीव’ है। पुष्पक विमान कुबेर जी के ही पास था जिसे रावण ने बलात कुबेर देव से छिन लिया था ।

जैसे देवताओं के गुरु बृहस्पति और राजा इन्द्र कहे गए है उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्राह्मांडों के धनाधिपति कुबेर देव कहे गए है। महाभारत में लिखा है कि कुबेर देव के साथ भार्गव-शुक्र तथा धनिष्ठा नक्षत्र भी दिखाई पड़ते हैं। इन तीनों की कृपा प्राप्त होने पर अटूट धन-वैभव की प्राप्ति होती है।

जीवन में सुख एवं ऐश्वर्य प्राप्ति की चाह रहने वाले सभी जातकों को यहाँ दिए गए उपाय अवश्य करना चाहिए ।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Tips/Remedies For Success in Court Cases

Mukadma Vijay YantraHere below we are giving some tips if performed with devotion will definitely benefit you:...

अक्षय तृतीया

"न क्षयः इति अक्षयः -----अर्थात जिसका क्षय ना हो वह है अक्षय"।

श्री यन्त्र | श्री मंत्र |Shri Yantra | Shri Mantra

श्री मंत्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ।।ॐ...

मुख्य द्वार | मुख्य द्वार का वास्तु

मुख्य द्वार के शुभ वास्तु से लाभMukhya dwar ke shubh vastu se labhवास्तुशास्त्र के अनुसार किसी भी...
Translate »