Saturday, May 28, 2022
Home karva chauth, करवा चौथ, Karva Chauth ka Mahatv, करवा चौथ का महत्त्व, करवा चौथ 2021,

Karva Chauth ka Mahatv, करवा चौथ का महत्त्व, करवा चौथ 2021,

Karva Chauth ka Mahatv, करवा चौथ का महत्व,

हिन्दू धर्म विशेषकर उत्तर भारत में करवा चौथ का महत्व Karva Chauth ka Mahatv, बहुत अधिक है । हर स्त्री चाहती है कि वह सदा सुहागन रहे, उसके सुहाग अर्थात उसके पति की उम्र लम्बी हो उनके दाम्पत्य जीवन में मधुरता, मिठास बनी रहे ।
इसीलिए कार्तिक माह की कृष्ण चन्द्रोदय चतुर्थी के दिन पत्नियाँ अपने अखंड सौभाग्य की कामना और अपने पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ Karva Chowth का निर्जल व्रत रखती हैं।

करवा चौथ Karva Chowth का व्रत भारतीय संस्कृति के अत्यंत पवित्र बंधन पति-पत्नी के बीच प्यार का प्रतीक है । भारतीय संस्कृति में पति को ईश्वर का दर्ज प्राप्त है इसी लिए उसे परमेश्वर माना गया है।
यह व्रत पति पत्नी दोनों के लिए ही एक-दूसरे के प्रति नव प्रणय निवेदन, हर्ष, प्रसन्नता, अपार प्रेम एवं त्याग को लेकर आता है।

जानिए, करवा चौथ का महत्त्व, Karva Chowth ka mahatva, करवा चौथ क्यों मनाया जाता है, Karva Chowth kyon manaya jata hai, करवा चौथ कब है, Karva Chowth kab hai, करवा चौथ 2021, Karva Chowth 2021, करवा चौथ कैसे मनाएं, Karva Chowth kaise manayen,

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय ( चंद्रमा के दिखने ) का समय

1- दिल्ली: 08 बजकर 08 मिनट

2-नोएडा: 08 बजकर 07 मिनट

3- मुंबई 08 बजकर 47 मिनट

4- लखनऊ: 07 बजकर 56 मिनट

5- पटना: 07 बजकर 42 मिनट

6-जयपुर: 08 बजकर 17 मिनट

7-अलीगढ़: 08 बजकर 06 मिनट

8-आगरा: 08 बजकर 07 मिनट

9- मथुरा: 08 बजकर 08 मिनट

10- कोलकाता: 07 बजकर 36 मिनट

11- देहरादून: 8 बजे

12: बरेली: 07 बजकर 59 मिनट

13- गोरखपुर: 07 बजकर 47 मिनट

14- बेगलुरु: 08 बजकर 39 मिनट

15- फर्रुखाबाद: 08 बजकर 01 मिनट

Karva Chauth ka Mahatv, करवा चौथ का महत्त्व,

करवा चौथ के ब्रत में सौभाग्यवती स्त्रियां भगवान शिव-पार्वती, गणेश और चन्द्रमा का पूजन करती है। यह ब्रत पति-पत्नी के पवित्र, अटूट और आत्मिक बंधन का प्रतीक है और यह उनके पवित्र रिश्ते में नई ताजगी एवं मिठास लाता है।

इस दिन पत्नियाँ सुबह से निर्जल ब्रत रखती है जो रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद उसे अर्घ्य देकर चलनी के अंदर से अपने पति का चेहरा देखकर अपने पति के हाथो से पानी पीकर ही पूर्ण माना जाता है ।

कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस बार 24 अक्‍टूबर रविवार को पड़ रही है। अर्थात इस बार करवा चौथ का व्रत (Karva Chowth Ka Vrat) 24 अक्‍टूबर को रखा जाएगा।

चतुर्थी तिथि का आरंभ रविवार 24 अक्‍टूबर को सुबह 3 बजकर 1 मिनट से,
चतुर्थी तिथि का समापन सोमवार 25 अक्‍टूबर को सुबह 5 बजकर 43 तक,

करवा चौथ Karva Chowth के दिन शाम 05 बजकर 45 मिनट से शाम 08 बजकर 52 मिनट तक का समय पूजा के लिए बहुत शुभ है, जिसके अंदर पूजा करने से श्रेष्ठ फल प्राप्त होंगे । इस दिन चन्द्रोदय का समय लगभग रात 08:11 बजे पर है जिसके बाद चन्द्रमा अर्घ्य देकर सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपना ब्रत खोल सकती है ।

इस साल करवा चौथ का व्रत बहुत शुभ रहने वाला है क्योंकि करवा चौथ का चांद इस बार रोहिणी नक्षत्र में निकलेगा ।

रोहिणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से चौथा नक्षत्र होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा है।

रोहिणी प्रजापति दक्ष की पुत्री और चंद्रमा की 27 पत्नियों में से एक है।
रोहिणी बहुत सुंदर, सौम्य, संवेदनशील, तेजस्वी रूप धारी तथा चन्द्र को अन्य सभी पत्नियों की अपेक्षा में सबसे प्रिय है।

कहा जाता है कि जब भी चंद्रदेव रोहिणी के करीब होते हैं तब चंद्रमा का निखार अपने चरम पर होता है।

धनतेरस पर यह करें खरीददारी, पूरे साल धन की नहीं होगी कोई कमी,  जानिए धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है  

इस दिन उगते हुए चन्द्रमा को जिसमे लालिमा रहती है जल देना ही श्रेयकर होता है । करवा चौथ Karva Chowth दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी भारत में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है।

करवा चौथ Karva Chowth की शुरुआत उससे 3-4 दिन पहले से ही हो जाती है जब सास अपनी बहु को सरगी ( श्रंगार का सामान, फल, मीठा, आदि ) देती है ।
यह सरगी सास की तरफ से अपनी बहू को सौभाग्यवती बने रहने का आशीर्वाद होता है ।
अब सरगी में पैसे दिए जाते है, मान्यता है कि बहु को इन्ही पैसे से अपने लिए श्रंगार का सामान, मिठाई, फल आदि लेने चाहिए ।

व्रत वाले दिन स्त्रियाँ प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन कर श्रंगार करके भगवान शिव-पार्वती के आगे माथा टेककर अपने लिए सौभाग्यवती बने रहने का आशीर्वाद मांगती है क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी भगवान को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था ।

उसके बाद अपनी सास द्वारा दी गयी सरगी के रूप में खाने की वस्तुओं जैसे फल, मिठाई आदि को व्रती महिलाएं प्रातः काल में तारों की छांव में ही ग्रहण कर लेती हैं। तत्पश्चात व्रत आरंभ होता है।
व्रत यह संकल्प बोल कर आरंभ करना चाहिए –

मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।

इस दिन स्त्रियां अपना पूरी तरह से दुल्हन की तरह साज-श्रृंगार करती हैं, अपने हाथों में मेहंदी और पैरो में महावर रचाती हैं और पूजा के समय लाल, गुलाबी, सुनहरे, पीले आदि सुन्दर / नए वस्त्र पहनती हैं।
इस दिन काले, सफ़ेद आदि वस्त्र नहीं पहनने चाहिए ।

हिन्दु धर्म में लाल रंग का विशेष महत्व है। लाल रंग को प्रेम, काम तथा ऊर्जा का प्रतीक मानते है। पूजा, विवाह तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर भी लाल रंग का जोड़ा पहना जाता है।

मान्यता है कि लाल जोड़े को पहनने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी कारण से करवा चौथ पर भी सुहागिनों को लाल रंग का जोड़ा पहनना शुभ माना जाता है।
यदि किसी कारण से यह संभव न हो सके तो लाल रंग की चुनरी तो अवश्य ही धारण करें ।

अवश्य पढ़ें :-  अगर लाख चाहने के बाद भी सम्मान ना मिलता हो तो अवश्य ही करें ये उपाय, जानिए मान सम्मान के उपाय

करवा चौथ Karva Chowth के दिन दोपहर में सुहागन स्त्रियां एक जगह एकत्रित होकर शगुन के गीत गाती हैं और शाम के समय कथा सुनने के बाद सर्वप्रथम अपनी सासू मां के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेती हैं और उन्हें करवा समेत अनेक उपहार भेंट करती हैं।

इस दिन स्त्रियाँ रात्रि के समय चन्द्रमा के निकलने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देकर उसकी पूजा करती हैं। फिर छलनी से चंद्र दर्शन के बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर पति के हाथों से जल पीकर अपने व्रत को पूर्ण करती है।

इस दिन स्त्रियां नव वधू की भांति पूर्ण श्रंगार कर सुहागिन के रूप में चंद्रमा से अपने अखंड सुहाग की प्रार्थना करती हैं। स्त्रियां ईश्वर के समक्ष यह प्रण भी करती हैं कि वे तन, मन, वचन एवं कर्म से अपने पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी, उनके अनुकूल रहेंगी अपने आचार व्यवहार से पत्नी के रूप में अपने घर, समाज के समस्त दायित्वों का सहर्ष निर्वाह करेंगी ।
कुंआरी कन्याएं इस दिन गौरा देवी का पूजन करती हैं जिससे उन्हें योग्य और प्रेम करने वाला समर्पित वर प्राप्त हो।

इस व्रत में रात्रि में भगवान शिव, माता पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, प्रभु गणेश और चंद्रमा जी के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा का भी विधान है।

करवा चौथ Karva Chowth के दौरान करवा का बहुत महत्व होता है। करवा मिट्टी का बर्तन होता है ।

इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियाँ करवा माँ से अपने पति की लम्बी आयु, पति से अटूट प्रेम और सुखी दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद मांगती है और पूजा के बाद इस करवा को अनेको उपहारों के साथ अपनी सास या सास के ना होने पर किसी योग्य महिला ( जिसे अपनी सास माना हो ) अथवा योग्य ब्राह्मण को दान में भी दिया जाता है।

करवा चौथ में ना करे ये काम, karva chowth men na karen ye kaam

करवाचौथ karva chowth के दिन विवाहित महिलाएं किसी को भी दूध, दही, चावल कोई भी सफेद कपड़ा या अन्य सफेद वस्तु न दें, मान्यता है कि ऐसा करने से चंद्र देव नाराज हो जाते हैं और उसके अशुभ फल मिल सकते हैं|

इस दिन विवाहिता स्त्री को सास, ससुर, नन्द, जेठ-जेठानी आदि किसी भी बड़े बुजुर्ग का भूल कर भी अपमान नहीं करना चाहिए
अन्यथा
माँ गौरी, गणपति जी, रुष्ट हो जाते है, उस स्त्री का व्रत पूरा नहीं माना जाता वर्ष भर घर में कलह, आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है |

मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार की सिलाई-कढ़ाई, सुई – धागे का काम नहीं करना चाहिए।

करवाचौथ karva chowth का व्रत करने वाली महिला को इस दिन सफेद या काला रंग नहीं पहनना चाहिए | इस दिन सफ़ेद और काले रंग के वस्त्र पहनना अशुभ माना जाता हैं|


इस दिन वे लाल, पीले, गुलाबी रंग के वस्त्र पहनें जो सुहाग से जुड़े रंग माने जाते हैं, इन रंगो के वस्त्र धारण करना सुहागिनों के लिए शुभ माना जाता है|

This image has an empty alt attribute; its file name is Pandit-Mukti-Narayan-Pandey-Ji-1.jpeg

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Published By : Memory Museum
Updated On : 2021-10-22 09:59:00 PM

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

सर्दी को दूर करने के उपाय, Sardi ko dur karne ke upay,

सर्दी को दूर करने के उपाय, Sardi ko dur karne ke upay,सर्दियों के मौसम Sardiyon ke mausam में...

ताम्बे के बर्तन में पानी पीने से लाभ

ताम्बे के पात्र में जल पीने से लाभtambe ke patr me jal pine se labhनिरोगिता अर्थात स्वस्थ शरीर...

डेंगू के अचूक उपाय, dengu ke achuk upay,

डेंगू के अचूक उपाय, dengu ke achuk upay,डेंगू dengue एक खतरनाक वायरल रोग है, जिसका वायरस संक्रमित...

Navratri Bhog Offered to Navdurga

The festival of Navratri has a great significance in the Hindu religion. The scriptures have elaborated the importance and benefits of...
Translate »