Thursday, September 17, 2020
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कुबेर यंत्र | Kuber Yantra

मन्त्र –ॐ श्रीं ॐ हीं श्रीं हीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नम: ॥

मन्त्र — ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रणवाय धनधान्यादिपतये,
                धनधान्यसमृद्धि में देहि देहि दापय दापय स्वाहा ।।

पुराणों के अनुसार राजाधिराज कुबेर देव Kuber Dev समस्त यक्षों, गंधर्वों और किन्नरों के स्वामी कहे गये हैं। धनाध्यक्ष कुबेर देव Kuber Dev नवनिधियों- पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और वर्चासु के स्वामी है। पुराणों के अनुसार एक निधि भी अनन्त वैभवों की प्रदाता मानी गयी है और राजाधिराज कुबेर देव Kuber Dev तो समस्त गुप्त, प्रकट संसार के समस्त निधियों वैभवों के देवता हैं।



कुबेर Kuber देवताओं के धनाध्यक्ष के रूप में विशेष प्रसिद्ध हैं। महाभारत में भी कहा गया है कि कुबेर महाराज Kuber Maharaj के साथ, भार्गव-शुक्र तथा धनिष्ठा नक्षत्र भी दिखलायी पड़ते हैं। इन तीनों की पूर्ण कृपा हुए बिना अनंत सुख एवं वैभव की प्राप्ति नही होती हैं। इसलिये इन वैभवों के लिये इन तीनों की संयुक्त उपासना का विधान विहित हैं।

पितामह ब्रह्मा की आज्ञा से कुबेर देव Kuber Dev त्रिकूट पर्वत पर विशकर्मा देव द्वारा स्वर्ण निर्मित अद्दितीय लंका नगरी में हर्ष पूर्वक निवास करने लगे । कुबेर देव Kuber Dev भगवान शंकर के परम भक्त थे, इनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु शिवजी ने इनको अपना मित्र का स्थान दिया और अलकापुरी में रहने की आज्ञा दी । महाराज कुबेर Maharaj Kuber का स्वरूप एवं उनकी उपासना से संबंधित कुबेर मंत्र Kuber Mantra, कुबेर यंत्र Kuber Yantra, ध्यान एवं उपासना आदि की सारी प्रक्रियाएं श्रीविधार्णव, मंत्रमहार्णव, मंत्रमहोदधि, श्रीतत्त्वनिधि तथा विष्णुधर्मोत्तरादि पुराणों में निर्दिष्ट हैं। तदनुसार इनके अष्टाक्षर, षोडशाक्षर तथा पंचत्रिंशाक्षरात्मक छोटे-बड़े अनेक मंत्र प्राप्त होते हैं।

इनके एक मुख्य ध्यान श्लोक में इन्हें मनुष्यों के द्वारा पालकी पर अथवा श्रेष्ठ पुष्पक विमान पर विराजित दिखाया गया है। समस्त निधियां इनके साथ मूर्तिमान् आभूषणों से विभूषित है। इनके एक हाथ में श्रेष्ठ गदा तथा दूसरे हाथ में प्रचुर धन प्रदान करने की वरमुद्रा सुशोभित है। ये उन्नत उदरयुक्त, स्थूल शरीर वाले हैं। ऐसे भगवान् शिव के परम सुहृद् भगवान् कुबेर Bhgwaan Kuber का ध्यान करना चाहिये।

अन्य सभी मंत्रों से भिन्न, कुबेर मंत्र Kuber Mantra को दक्षिण की और मुख करके साधने की परंपरा है। इस कुबेर यंत्र Kuber Yantra के विधिवत पूजन एवं कुबेर मन्त्र Kuber Mantra के शास्त्रानुसार पूजन, जप, अर्चन, ध्यान,उपासना से मनुष्यों के सभी दुःख दरिद्र अवश्य ही दूर होते है और भगवन शिव के परम मित्र होने के कारण इनकी समस्त संकटों से रक्षा होती है।

यह कुबेर मंत्र Kuber Mantra, कुबेर यंत्र Kuber Yantra, और मंत्र जीवन की सभी श्रेष्ठता को देने वाला समस्त सुख सौभाग्य, ऐश्वर्य, लक्षमी, दिव्यता, पद प्राप्ति, सुख सौभाग्य, व्यवसाय वृद्धि, सन्तान सुख Santan Sukh, उत्तम स्वास्थ्य, आयु वृद्धि, और समस्त भौतिक सुखों को देने में निश्चय ही समर्थ है।

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जीवन में कई बार ऐसा भी समय आता है जब व्यक्ति बहुत परिश्रम करता है, धर्म में भी उसकी आस्था होती है, कोई बुरे कार्य भी नहीं करता है फिर भी उसे उचित फलप्राण नहीं होते है, जीवन में लगातार संघर्ष बना रहता है , ऐसे समय में हम यंत्रों और पूजा पाठ का सहारा लेते है । मनुष्य की हर परेशानी के हल के लिए, हर इच्छा की पूर्ति के लिए अलग – अलग यंत्रों की सहायता ली जाती है । किसी भी मनुष्य के लिए इस तमाम यंत्रों की स्वयं स्थापना और शास्त्रानुसार रखरखाव कर पाना नामुमकिन सा है । लेकिन अब विश्व में पहली बार इस साईट में अनेकों दुर्लभ सिद्ध यंत्रों की प्राण प्रतिष्ठा की गयी है । इस साईट पर दिए गए सभी यंत्रों को योग्य ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रानुसार पूर्ण विधि विधानुसार इस तरह से जप, यज्ञ, द्वारा सिद्ध करके प्राण प्रतिष्ठित किया गया है जिससे सभी व्यक्तियों को ( चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाले हो) निश्चित ही अभीष्ट लाभ की प्राप्ति हो । तो अब आप भी इन अत्यंत दुर्लभ यंत्रों का अवश्य ही लाभ उठायें ।

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