Saturday, April 17, 2021
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पितृदोष कैसे दूर करें, Pitradosh kaise dur karen,

पितृदोष कैसे दूर करें, Pitradosh kaise dur karen,

  • पूर्वजों का अपमान करने से पितृ ऋण बनता है, शास्त्रों के अनुसार पितृ दोष Pitr dosh से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली मानी जाती है।
    ऐसे व्यक्ति जो अपने माता पिता या अपने मातृपक्ष अर्थात मामा-मामी मौसा-मौसी, नाना-नानी या पितृपक्ष अर्थात दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि को दुखी करते है और उनका तिरस्कार करते है उनकी कुंडली में अगले जन्म में पितृ दोष Pitr dosh होता है।

  • पितृ दोष Pitr dosh के कारण व्यक्ति को जीवन में बहुत अधिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है उसके काम बनते बनते बिगड़ जाते है, उसे समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है। परिवार में कलह होने के साथ-साथ संतान का ना होना या संतान की ओर से कष्ट या संतान का स्वास्थ्य खराब रहना आदि परेशानी का सामना करना पड़ता है।
    पितर दोष के कारण जातक या उसके परिजनों को कई असाध्य रोग भी हो जाते है, घर के सदस्यों को कर्ज, मुक़दमे का सामना करना पड़ता है ।
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  • व्रहन्याराशरहोरा शास्त्र तथा पुराणों में भी कई स्थानों पर पितृ दोष Pitra Dosh का वर्णन मिलता है। तमाम कथाएं एवं उदाहरण है जो बताते है कि पित्तरों के संतुष्ट ना होने के गम्भीर परिणाम हुये है ।
  • तथा जो लोग अपने पित्तरों के प्रति आदर श्रद्धा एवं उनका स्मरण करते है तथा उनके निमित धर्मानुसार श्राद्ध एवं धार्मिक कर्त्तव्यों का पालन करते है उनका जीवन सुख समृद्धि Shukh Samridhi सफलता एवं यश से परिपूर्ण होता है।
    जीवन में हर मुश्किल समय में यह पित्तर उनकी सहायता करते है तथा अदृश्य रक्षा कवच के रूप में यह अपने वंशजो की रक्षा भी करते है।

पितृदोष कैसे दूर करें, Pitradosh kaise dur karen,

  • पितृ दोष Pitradosh जो व्यक्ति के जीवन में श्राप की तरह होता है वह आशीर्वाद के रूप में भी बदल सकता है। समान्यतः इस युग में ज्यादातर मनुष्यों पर उसके पित्तरों का ऋण होता है, इससे बचने के लिये हमें अपने माता पिता गुरूजनों तथा अन्य बड़े बुजर्गों को सदैव आदर देकर उन्हे संतुष्ट रखना चाहिये।
  • अपने पित्तरों के प्रति हमेशा श्रद्धा एवं कृतज्ञता का भाव रखना चाहिये।
  • भोजन से पहले अपनी रोटी से चौथाई रोटी निकाल कर उसे गाय तथा चिड़िया को खिलायें।
  • प्रत्येक मनुष्य चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाला क्यों ना हो उसे अपने घर में किसी भी शुभ,नवीन एवं धार्मिक कार्य करते समय पित्तरों का स्मरण करके उनसे आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिये ।
  • प्रत्येक मौसम में आने वाला नया फल भी अपने पूर्वजों के नाम से किसी भी निर्धन व्यक्ति को या धार्मिक स्थल में अवश्य ही देना चाहिये।
  • हर अमावस्या के दिन घर पर पितरों के निमित एक ब्राह्मण को भोजन कराकर उसे दक्षिणा देकर उनसे आशीर्वाद लें । इससे पितृ प्रसन्न होते है, घर से कलह दूर रहती है, कार्यो में सफलता मिलती है।
  • चूँकि परिवार के किसी भी सदस्य का पितृ दोष Pitra Dosh से पीड़ित होने पर उसका प्रभाव पूरे परिवार पर ही पडता है अतः यह सभी मनुष्यों का पुनीत कर्त्तव्य है कि वे अपने समस्त ज्ञात अज्ञात पूर्वजों के प्रति आदर एवं श्रद्धा का भाव रखते हुये उनका स्मरण करते रहें।
  • जिस प्रकार एक भौतिक शरीर को भोजन, पानी, हवा, घर, परिवार, कपड़े, शिक्षा स्नेह एवं तमाम भौतिक सुख सुविधाओं की आवश्यकता होती है उसी प्रकार सूक्ष्य शरीर को भी आदर, श्रद्धा, कृतज्ञता, स्मरण, श्राद्ध Shradh,तर्पण Tarpan, धार्मिक तथा अध्यात्मिक क्रियाओं की अनिवार्य आवश्यकता होती है।

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  • जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र को स्नेह, शिक्षा देते हुये उसके बचपन की तमाम खुशियों का ध्यान रखता है तथा एक पुत्र के लिये उसका पिता ही समस्त आशाओं का केन्द्र एवं देवदूत होता है उसी प्रकार हमारे पूर्वजों के लिये भी उनका वंशज ही समस्त आशाओं का केन्द्र होता है।

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