Tuesday, April 20, 2021
Home पितृ पक्ष shradh ka mahatv, श्राद्ध का महत्व,

shradh ka mahatv, श्राद्ध का महत्व,

shradh ka mahatv, श्राद्ध का महत्व,

हिन्दू धर्म शास्त्रों में श्राद्ध का महत्व बहुत अधिक बताया गया है । शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य श्राद्ध करता है वह पित्तरों के आशीर्वाद से आयु, पुत्र, यश, बल, वैभव, सुख तथा धन-धान्य प्राप्त करता है। इसीलिये हिन्दू लोग अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन नियमपूर्वक स्नान करके पित्तरों pitron का तर्पण करते है तथा जो दिन उनके पिता की मृत्यु का होता है उस दिन अपनी शक्ति के अनुसार दान एवं ब्राहमणों को भोजन कराते है।

पहले समय में इस देश में श्राद्ध कर्म का बहुत प्रचार था लोग अपने कर्त्तव्य पालन के लिये सुध-बुध भूल जाते थे, लोग सम्पूर्ण पितृ पक्ष में दाढ़ी, बाल नहीं बनाते थे, तेल नहीं लगाते थे, किसी प्रकार का नशा नहीं करते थे तथा पित्तरों pitron को पुण्य प्रदान करने के लिये सत्कर्म, दान, पुण्य, पूजा-अर्चना में लगे रहते थे।

Tags : – श्राद्ध, shradh, श्राद्ध का महत्व,shradh ka mahtv, पितरों का श्राद्ध, pitron ka shradh, pitrpaksh,श्राद्ध कैसे करें, shradh kaise Karen, pitrpaksh, क्यों करना चाहिए श्राद्ध , kyu karna chahiye shradh, हमारे पितृ, pitru paksha, hamare pitra,

श्राद्ध का महत्व, shradh ka mahatv,

* पित्तरों pitron का पिण्डदान करने का सबसे बड़ा स्थान बिहार में “गया” को माना गया है। यह मान्यता है कि गया में पिण्डदान करने से फिर प्रतिवर्ष पिण्डदान की आवश्यकता नहीं रहती है। इसे “तीर्थों का प्राण” तथा “पाँचवा धाम” भी कहते है।

* माता के श्राद्ध के लिए काठियावाड़ में ‘सिद्धपुर’ को अत्यन्त फलदायक माना गया है। इस स्थान को ‘मातृगया’ के नाम से भी जाना जाता है।

* गया में पिता का श्राद्ध करने से पितृऋण से तथा सिद्धपुर में माता का श्राद्ध करने से मातृऋण से सदा-सर्वदा के लिए मुक्ति प्राप्त होती है।

* महाराष्ट्र में त्र्यम्बकेश्वर,

* हरियाणा में पिहोवा,

* उत्तर प्रदेश में गडगंगा,

* उत्तराखंड में हरिद्वार भी पितृ दोष के निवारण के लिए श्राद्धकर्म को करने हेतु उपयुक्त स्थल हैं।
इन स्थलों में जाकर वे श्रद्धालु भी पितृ पक्ष के श्राद्ध आरंभ कर सकते हैं, जिन्होंने पहले कभी भी श्राद्घ न किया हो।

* श्राद्ध श्रद्धा शब्द से बना है। श्रद्धापूर्वक किये गये कर्म को श्राद्ध कहते है। पित्तरों का श्राद्ध करने से कुछ लाभ है अथवा नहीं इसका उत्तर है कि लाभ है अवश्य है और यह लाभ श्राद्ध करने वाले को अत्यधिक तथा पित्तरों को उसका सूक्ष्म अंश मिलता है जिससे वह अत्यधिक शक्ति, प्रसन्नता एवं सन्तोष का अनुभव करते हैं ।

* क्योंकि इस संसार में प्रत्येक जीव या आत्मा किसी ना किसी रूप में विद्यमान अवश्य रहती है। श्राद्ध के समय पित्तरों के द्वारा जो हमारे ऊपर उपकार हुये है उनका स्मरण करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा एवं भावना जरूर व्यक्त करनी चाहिये।

* यह मान्यता है कि पित्तर पक्ष में जिस दिन हमारे पित्तरों का श्राद्ध होता है वह स्वयं भी वहाँ सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं तथा ब्राहमणों के साथ वायु रूप में भोजन करते है।

* महाभारत में एक प्रसंग है कि जब भीष्म जी अपने पिता महाराज शान्तनु का पिण्डदान करने लगे तो उनके सम्मुख साक्षात शान्तनु जी के दाहिने हाथ ने प्रकट होकर पिण्ड ग्रहण किया।

* कहते है कि भगवान श्रीराम ने भी गया आकर फाल्गू नदी के किनारे अपने पिता राजा दशरथ का पिण्डदान किया था।

* रामायण के अनुसार जब मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम वन में अपने पिता का श्राद्ध कर रहे थे तब सीता जी ने श्राद्ध की समस्त सामग्रियां स्वयं अपने हाथ से तैयार की लेकिन जब ब्राहमणों को भोजन करने के लिये आमंत्रित किया गया तो वह कुटी में जल्दी से जा छुपी।
बाद में जब भगवान राम ने सीता जी से उनकी परेशानी एवं छुपने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा मैंने उन ब्राहमणों में आपके पिता महाराज दशरथ जी के दर्शन किये है, उनके सम्मुख मैं सदैव आभूषणों से सुशोभित रही हूँ वह कैसे मुझे इन कपड़ों में बिना आभूषणों, पसीने मैल से सना हुआ देख पाते।

* इसलिये श्राद्ध की तिथि में इस बात का भान रहे कि आपके पित्तर किसी ना किसी रूप में स्वयं उपस्थित हैं तथा आपका उनके निमित्त श्रद्धा से किये गये कर्म से वह अवश्य ही संतुष्ट होंगे तथा आपको आशीर्वाद देंगे लेकिन अगर हमने उनके प्रति आभार कृत्तज्ञता एवं श्राद्ध कर्म नहीं किया तो वह फिर पूरे वर्ष निराशा, बेचैनी, निर्बलता एवं दुख का अनुभव करेंगे। शास्त्रों में भी श्राद्ध कर्म को हर हिन्दू का पुनीत एवं अनिवार्य कर्त्तव्य बताया गया है।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Rakshabandhan ka itihas, रक्षाबंधन का इतिहास,

रक्षाबंधन 2020, Rakshabandhan 2020,रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) या राखी हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है जो...

केतु ग्रह के उपाय | Ketu Grah Ke Upay

केतु ग्रह के उपाय, Ketu Grah Ke Upay,केतु ग्रह Ketu Grah का शुभाशुभ प्रभाव...

Tips/Remedies For Success in Whole Life

Sarva karya Siddhi YantraFor Attaining All-Round Success in LifeRemedies To Overcome Obstacles and Attain...

सूर्य को अर्ध्य | Surya ko Ardhya

भगवान सूर्य देव को अर्ध्य देने के लाभइस संसार में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देव कहा जाता...
Translate »