Tuesday, November 29, 2022
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शनि जयंती, shani jyanti, shani jyanti 2022,

शनि जयंती, shani jyanti,

हिन्दू धर्म शास्त्रों में शनि जयंती, shani jyanti, का बहुत महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि शनिदेव का जन्म को हुआ था। इस वर्ष 2022 में शनि जयंती, shani jyanti, 30 मई को है।

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारम्भ- 29 मई को अपराह्न 2 बजकर 54 मिनट से
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का समापन- 30 मई को सांय 4 बजकर 58 मिनट पर

लेकिन सोमवार, 30 मई को उदया तिथि के कारण इस बार शनि जयंती, shani jyanti, 30 मई को ही मनाई जाएगी।

इस वर्ष शनि जयंती, shani jyanti, पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है जिसका विशेष महत्त्व है । कहते हैं कि शनि जयंती, shani jyanti, के दिन किए गए उपायों का फल अनंत गुना मिलता है।

शनि जयंती के दिन अति शुभ सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 07 बजकर 13 मिनट से प्रारम्भ होकर 31 मई को सुबह 05 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

इस वर्ष शनि जयंती, shani jyanti, के दिन वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या का भी विशिष्ठ संयोग है।

सोमवती अमावस्या, वट सावित्री, कृतिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि के विशिष्ठ संयोग में भगवान शनि देव के जन्मोत्सव का पर्व मनाना अत्यंत पुण्य दायक बन गया है।

सोमवती अमावस्या के दिन इस कथा को पढ़ने सुनने से मिलता है अक्षय पुण्य, पितरो की मिलती है असीम कृपा, अवश्य पढ़ें सोमवती अमावस्या की कथा

इस समय कुंभ, मकर व मीन राशि वाले पर शनि की साढ़े साती चल रही हैं और कर्क व वृश्चिक राशि वालों पर शनि की ढैय्या चल रही है। इसलिए इन 5 सभी राशि वालों के लिए शनि जयंती का दिन बहुत ही विशेष माना जा रहा है।
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  •  शनि देव Shani Dev को न्याय का देवता कहा गया है जो मनुष्यों को उनके कर्मो के अनुसार फल देते है। जीवन में किसी भी तरह के सुखो की प्राप्ति हेतु शनि देव को अपने अनुकूल करना उनकी कृपा प्राप्त करना परम आवश्यक है।
  • कहते है जिस भी जातक पर शनिदेव की कृपा होती है वह उसे रंक से राजा बना देते हैं। शनिदोषो से मुक्ति पाने के लिए शनि जयंती का दिन बहुत ही विशेष माना जाता है।
  •  शास्त्रों के अनुसार शनि देव की कृपा प्राप्त करके सभी मनोरथो को अवश्य सिद्द किया जा सकता है।
  •  शनिदेव को परमपिता परमात्मा के जगदाधार स्वरूप कच्छप का ग्रहावतार और कूर्मावतार भी कहा गया है।
  •  वह महर्षि कश्यप के पुत्र सूर्यदेव की संतान हैं। उनकी माता का नाम छाया है।
  •  इनके भाई मनु सावर्णि, यमराज, अश्वनी कुमार जी है और शनि देव की बहन का नाम यमुना और भद्रा है।
  •  उनके गुरु शिवजी हैं और उनके मित्र हैं काल भैरव, हनुमान जी, बुध और राहु ।
  •  शनि न्याय के देवता है जो यदि शनिदेव बुरे कर्मो का दण्ड देते हैं तो शुभ कामों से कृपा भी बरसाते हैं। शास्त्रों में शनि के दस अति पुण्य प्रदान करने वाले नामों का वर्णन है, जिनका स्मरण,जप करने से ही सभी बड़े से बड़ा सकंट कैसे भी दु:खों का नाश होता है।
  • विशेषकर शनिवार को तो शनि देव के वह दस कल्याणकारी नमो का अवश्य ही उच्चारण करना चाहिए यदि पीपल के पेड़ के नीचे इन नामो का जाप किया जाय तो शनि देव अति प्रसन्न होते है। शनि देव के 10 नाम है :—–
  • कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मन्द, पिप्पलाश्रय

    अवश्य पढ़ें :- पथरी को हो समस्या, ऑपरेशन कराने की सोच रहे है तो, थोड़ा रुके, इस उपाय से पथरी की समस्या होगी जड़ से दूर,
  •  ज्यातिष शास्त्रों में सूर्य पुत्र शनि देव को कठोर एवं क्रूर ग्रह बताया गया है जिनकी दशा में समान्यता जातक को कष्ट उठाने पड़ते है । लेकिन इनसे हमेंशा अशुभ परिणाम ही नहीं मिलते हैं। शनि ग्रह से सम्बन्धित फलादेश देखते समय यह अवश्य ही देखना चाहिए कि क्या साढ़े साती सचमुच अशुभ फलदायी है।
  •  यदि शनि प्रतिकूल हो तो यहाँ बताये जा रहे उपायों को करें, अपना चरित्र उत्तम बनाए रखे धैर्य का साथ ना छोड़े, बड़े बुजुर्गो और स्त्रियों को पूर्ण सम्मान दें तो शनि की दशा आसानी से कट जाती है ।
  • शनि देव के प्रकोप से बचने उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनकी पत्नी के 8 नामो,
    ध्वजीनि, धामिनी, कंकाली, कलह प्रिया, कंटकी, तरंगी, महिषि, अजा का अवश्य स्मरण करना चाहिए।
  • जब किसी जातक को शनि देव की कृपा प्राप्त होती है तो उसका भाग्य जागृत हो जाता है। शनि देव में रंक को राजा बनाने की शक्ति है ।
  •  शनिवार के दिन शनि भगवान की विधि पूर्वक पूजा करने से शनि महाराज प्रसन्न होते है। अगर कुंडली में शनि की दशा, या किसी भी ग्रह की दशा खराब चल रही है तो भी इस दिन उनकी आराधना करने से अशुभ ग्रहो के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • शनिवार के दिन मंदिर में शनि देवता के दर्शन अवश्य करें लेकिन ध्यान रहे कि उनकी आँखो में झाँकने की गलती भूल कर भी ना करें |
  •  शनि देव को काला / नीला रंग अति प्रिय है। शनिवार के दिन सांय काल शनि मंदिर में शनि देव पर काला वस्त्र और सुरमा अवश्य ही चढाएं।
  •  शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, सांय काल प्रदोष काल में ( 6 बजे से 8 बजे के बीच ) पीपल पर भी दीपक अवश्य ही जलाएं ।
  •  शनि देव पर कड़वा तेल ( सरसो का तेल ) काले उड़द, काले तिल, लोहा, गुड़ एवं नीले या काले पुष्पों चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते है ।
  •  कोई भी पूजा बिना प्रशाद के पूरी नहीं होती है , शनिवार के दिन शनि देव को प्रसाद के रूप में श्री फल / नारियल , इमरती या तेल से बनी वस्तुएं के साथ अन्य फल चढ़ाएं, इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है, कार्यो से अड़चने दूर होती है, आर्थिक हानि हो रही हो तो बंद होती है।
  •  शनि की साढ़े के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए नित्य हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन नंगे पैर हनुमान मंदिर जाएॅ और वहाँ पर जाकर अपने माथे पर उनके चरणो का सिंदूर लगाएॅ।
  •  शनि की दशा में शुभ फलों की प्राप्ति हेतु काले घोड़े की नाल की अंगूठी बनाकर उसे दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर में सरसों का तेल और तांबा चढ़ाना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में कड़वा तेल डालकर उसमें एक रूपया डालकर अपना चेहरा देखते हुए शनि का दान लेने वाले को दान दें ।
  •  शनि दशा में महामृत्युंजय मंत्र का जाप रोज 108 बार करें। अथवा कम से कम 21 बार तो जरुर करें।
  •  शनि जयंती के दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाते हुए काले तिल चढ़ाएं ।
  •  शनि की दशा में रात्रि के समय कुत्ते को दूध पिलायें, लेकिन स्वयं न पियें।
  •  शनि की दशा में शराब, माँस, मछली अण्डे आदि का सेवन न करें।
  •  नित्य अपनी थाली के भोजन मे से एक रोटी अलग करके उसके तीन हिस्से करके , एक गाय , एक कुत्ते और एक कौओं को खिलाएॅ।

  • Published By : Memory Museum
  • Updated On : 2022-05-29 06:10:55 PM

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