Wednesday, June 12, 2024
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केतु ग्रह के उपाय | Ketu Grah Ke Upay

केतु ग्रह के उपाय, Ketu Grah Ke Upay,

केतु ग्रह Ketu Grah का शुभाशुभ प्रभाव एवं केतु ग्रह के उपाय Ketu Grah Ke Upay ——-

  • केतु ग्रह Ketu Grah का सीधा प्रभाव मन से है अर्थात केतु की निर्बल या अशुभ स्थिति चंद्रमा अर्थात मन को प्रभावित करती है और आत्मबल कम करती है। केतु ग्रह Ketu Grah से प्रभावित व्यक्ति अक्सर डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।

    भय लगना, बुरे सपने आना, शंकालु वृत्ति हो जाना भी केतु के ही कारण होता है। केतु ग्रह Ketu Grah और चंद्रमा की युति-प्रतियुति होने से व्यक्ति मानसिक रोगी हो जाता है। व्यसनाधीनता बढ़ती है और मिर्गी, हिस्टीरिया जैसे रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • यदि आपकी कुंडली में भी केतु ग्रह पीड़ित /कमजोर का होकर स्थित है तो करे निम्नलिखित उपाय और बनाये मजबूत–
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केतु यंत्र :- ( Ketu Yantra ) केतु के शुभ फलो हेतु केतु के यंत्र को धारण करना चाहिए। इस यंत्र को धारण करने से केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते है। जातक को धन, सुख-समृद्धि, यश की प्राप्ति होती है, साहस मिलता है, मनोबल बढ़ता है।

केतु यंत्र को बुधवार के दिन शुभ चौघड़ियों में काले / भूरे सूती या रेशमी धागे में बांध कर गले या बाँह में धारण करना चाहिए। एवं केतु यंत्र को नित्य या बुधवार के दिन अवश्य ही देखकर पढ़ना चाहिए।

(Ketu ka Mantra ) केतु का तांत्रिक मन्त्र :- “ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः”।।

(Ketu ka Mantra ) केतु पौराणिक मन्त्र :- “ॐ केँ केतवे नम:”।।

उपरोक्त दोनों मंत्रो में से किसी भी एक मन्त्र का विधिवत जाप कराने से केतु के अशुभ फल निश्चय ही दूर होते है। केतु मन्त्र का कम से कम 7000 या अधिकतम 28000 जप पूर्णतया फलदाई होता है।

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केतु के दान :- ( Ketu ke dan ) यदि कुंडली में केतु अशुभ फल दे रहे हो तो बुधवार के दिन संध्या के समय लहसुनिया, तिल तेल, तिल के बीज, काला कंबल, कला वस्त्र, कस्तूरी, सात प्रकार का अन्न, केला, आदि किसी सात्विक ब्राह्मण को पूर्ण श्रद्धा से दक्षिणा सहित दान चाहिए।
इससे केतु के अशुभ फल दूर होते है, शुभ फल मिलने लगते है।

केतु ग्रह के औषधि स्नान :- केतु ग्रह को अपने अनुकूल करने के लिए बुधवार के दिन प्रात: जल में लाल चन्दन डालकर स्नान करने से केतु ग्रह के अनुकूल फल मिलते है।

केतु गृह को अनुकूल बनाने के उपाय, Ketu Grah ko anukul banna ke upay

  • समय समय पर भगवान शिव जी का पार्थिव पूजन एवं अभिषेक करावे तथा मंदिर में काला-सफेद कंबल दान करें।
  • नित्य मस्तक में केसर का टीका लगाएं और केशर का दान करे तथा शंक्रांति के समय छाया दान करें ।
  • यदि मंदिरों की धार्मिक यात्रा करें और मंदिरों में सिर झुकाएं तो दूसरे भाव का केतू अच्छे परिणाम देगा।
  • यदि संतान से परेशान है तो मंदिर में काले और सफेद रंग वाला कंबल दान करें।
  • कान में सोना पहनें। बड़ों का सम्मान करें, विशेषकर ससुर का सम्मान जरूर करें।
  • सोने की सलाई गर्म करके दूध में बुझाएं और इसके बाद उस दूध को पियें इससे मानसिक शांति बढेगी, आयु वृद्धि होगी और यह बेटों के लिए भी अच्छा रहेगा।
  • चरित्र का ढीला नहीं होना चाहिए। बुरी संगतो एवं मादक पदार्थो का सेवन न करें।
  • प्रतिदिन गणेशजी का पूजन-दर्शन करें। काले, सलेटी रंगों का प्रयोग न करें।
  • मजदूर, अपाहिज व्यक्ति की यथासंभव मदद करें। लोगों में उठने-बैठने, एवं सामाजिक होने की आदत डालें।
  • लहसुनिया पहनने एवं दान करने से भी केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
  • नित्य केतु के बीज मंत्र ॐ ह्रीं ऐं केतवे नमः इस मंत्र का 108. (1.माला) बार जप करे।

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Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-12-19 05:47:00 PM

Amit Pandit ji
ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु
एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ

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