HomeGrahan, ग्रहणसूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai, सूर्य ग्रहण...

सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai, सूर्य ग्रहण 2026,

सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai,

सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) के अदभुत खगोलीय घटना है जो प्राय: प्रति वर्ष पूरी दुनिया में होती ही है, हमारे ज्योतिषियों को यह पता होता है कि सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai । कई बार कोई सूर्यग्रहण ( Suryagrahan ) विश्व के किसी हिस्से में दिखाई देता है कई बार किसी और जगह।

सूर्य ग्रहण Surya grahan सदैव अमावस्या को ही होता है। पृथ्वी अपनी कक्षा में सूरज की परिक्रमा करती है और चन्द्रमा भी अपनी कक्षा में ही पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो सूर्य चन्द्रमा के पीछे कुछ समय के लिए छुप जाता है ढक जाता है, चन्द्रमा सूरज का आंशिक या सारा प्रकाश रोक लेता है जिससे धरती पर कुछ समय के लिए हल्का अंधकार फैल जाता है इसे ही सूर्य ग्रहण Surya grahan कहते है।

समान्यता सूर्य ग्रहण तीन तरह के होते है

आंशिक सूर्य ग्रहण,

पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा

वलयाकार सूर्य ग्रहण ।

1. जब चन्द्रमा, सूरज के थोड़े से हिस्से को ही ढ़कता है, अर्थात पृथ्वी से सूर्य का कुछ ही भाग दिखाई नहीं देता है तो उसे खण्ड- सूर्य ग्रहण या आंशिक सूर्य ग्रहण कहते है।

2. लेकिन जब कभी चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से ढँक लेता है, तो वह पूर्ण- सूर्य ग्रहण कहलाता हैं। पूर्ण-सूर्य ग्रहण पृथ्वी के बहुत कम हिस्से में ही दिखता है, ज़्यादा से ज़्यादा 250 किलोमीटरक्षेत्रमें। इस क्षेत्र के बाहर केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखाई देता है।

पूर्ण-ग्रहण के समय सूरज के सामने से चन्द्रमा को गुजरने में सिर्फ दो घण्टे लगते हैं तथा चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से, अधिक से अधिक, सात मिनट तक ही ढँक पाता है। इन कुछ मिनटों के लिए आसमान में अंधकार सा हो जाता है।

3. वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात सूर्य को चन्द्रमा इस प्रकार ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और

पृथ्वी से चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता वरन सूर्य का बाहरी भाग प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता हुआ दिखाई देता है। तो कंगन के आकार में बने इस सूर्यग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है।

हमारे ऋषि मुनियों , ज्योतिषियों ने अति प्राचीन काल से ही ग्रहण की बिलकुल सटीक गणना करना प्रारम्भ कर दी थी।

जानिए सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai, सूर्य ग्रहण कब है , ( Surya grahan kab hai ) सूर्य ग्रहण कब होगा,( Surya grahan kab hoga ) सूर्य ग्रहण कैसे लगता है, sury grahan kaise lagta hai, सूर्य ग्रहण, sury grahan, सूर्य ग्रहण, sury grahan 2026,

सूर्य ग्रहण कब है, Sury Grahan Kab Hai

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में 4 ग्रहण लगेंगे 2 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण I

सूर्य ग्रहण 2 जरूर लगेंगे लेकिन दोनों में कोई भी सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा 1 पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा और दूसरा ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा I

इसके विपरीत दोनों चंद्रग्रहण भारत मे दिखाई देंगे इसलिए इनका धार्मिक महत्व भी होगा I पहला चंद्र ग्रहण होली पर 3 मार्च 2026 को लगेगा I यह चन्द्र ग्रहण भारत मे थोड़ी ही देर शाम 6.26 से शाम 6.46 तक दिखाई देगा I इसमें चंद्रमा थोड़ा धुंधला दिखाई देगा I

यह ग्रहण भारत में लगने के कारण इसका सूतक काल भी माना जाएगा और मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे I

दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में 28 अगस्त 2026 को लगेगा, यह एक आंशिक ग्रहण होगा I

12 अगस्त बुधवार 2026 को सावन माह की अमावस्या, हरियाली अमावस्या के दिन वर्ष 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है । यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा । सूर्य ग्रहण पर चंद्र और गुरु की युति से गज केसरी योग का भी निर्माण हो रहा है ।

यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा और खगोलीय दृष्टि से काफी विशेष है। लेकिन भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ।

. ग्रहण कब लगेगा?

तिथि: बुधवार, 12 अगस्त 2026
ग्रहण का प्रकार: पूर्ण सूर्य ग्रहण
वैज्ञानिक घटना: चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ समय के लिए पूरी तरह ढक देगा।

28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण भी होगा, इसलिए अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से विशेष महीना है।

यह ग्रहण की पूर्णता की पट्टी उत्तरी साइबेरिया से शुरू होकर आर्कटिक क्षेत्र, आइसलैंड और स्पेन तक जाएगी। ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन तथा रूस के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

भारत में 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। भारत इस ग्रहण की न तो पूर्णता वाली पट्टी में है और न ही उस व्यापक क्षेत्र में जहाँ आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। भारत में उस समय सूर्य क्षितिज के नीचे होगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिखाई देगा:

उत्तरी रूस/साइबेरिया, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल के कुछ हिस्से, उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र, इसके अतिरिक्त यूरोप और उत्तरी अमेरिका तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

इस ग्रहण की शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगी, जबकि समाप्ति देर रात 01 बजकर 28 मिनट पर होगी।

यह ग्रहण भारत के समय के अनुसार लगभग रात 11:17 बजे होगा। यानी भारत में यह घटना रात के समय होगी और इसीलिए सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा।

हिंदू परंपरा में सामान्यतः सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक माना जाता है। लेकिन धार्मिक परंपराओं में सूतक की मान्यता अक्सर दृश्य ग्रहण से जुड़ी मानी जाती है।

12 अगस्त 2026 का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसके लिए सामान्य रूप से सूतक मान्य नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि भारत में मंदिर बंद करने, पूजा रोकने या भोजन संबंधी कठोर ग्रहण-नियम लागू करने की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।

हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने के कारण इस दिन कोई भी बड़ी खरीद, निवेश या शुभ कार्य का प्रारम्भ टालना ही श्रेयकर होगा ।

सूर्य ग्रहण के दिन / समय में अधिक से अधिक

ॐ नम: शिवाये और

ॐ घृणि सूर्याय नम:

का जाप करना चाहिए ।

सूर्य ग्रहण के दौरान खाना खाने की, काटने, छीलने, सिलाई करने, जमीन खोदने का काम करने, सोने की मनाई होती है, शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

क्या आप जानते है कि देवी देवताओं की परिक्रमा का बहुत अधिक महत्त्व है, जानिए किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए

ग्रहण काल में कुछ सावधानियाँ अवश्य ही रखनी चाहिए, ग्रहण काल में भूल कर भी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण विश्व के किसी भी कोने में क्यों ना हो ग्रहण काल में जप तप का अक्षय पुण्य मिलता है ।

गुस्सा बहुत आता है, बिलकुल भी नियंत्रण नहीं रहता है तो गुस्सा दूर करने के लिए अवश्य करें ये उपाय

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो, आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

पं मुक्ति नारायण पाण्डेय

( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Pandit Ji
Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular